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श्री हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi & English (2026)

श्री हनुमान चालीसा हिन्दू धर्म में बड़ी प्रसिद्ध आराधना है। इसके अर्थ, पाठ करने के फायदे और सही तरीका जानने के लिए यह गाइड पढ़ें।

Vikas Sahu
Vikas SahuAuthor
Updated Aug 5, 2026·12 min read
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लाखों लोग रोज़ाना श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति पाते हैं। हनुमान चालीसा, हनुमान जी की स्तुति में गाया जाने वाला एक हिंदू भक्ति-गीत है, जिसका हिंदू लोग नियमित रूप से पाठ करते हैं। इसे तुलसीदास ने अवधी भाषा में लिखा था और यह रामचरितमानस का सबसे प्रसिद्ध अंश है। हनुमान एक हिंदू देवता हैं और भगवान राम के भक्त हैं। वे रामायण के मुख्य पात्रों में से एक हैं।

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What is Hanuman chalisa?

हनुमान चालीसा भगवान हनुमान को समर्पित एक आरती है जिसमें शक्तिशाली शब्द समाहित हैं; इसका पाठ करने से ही शांति मिलती है।

Story of Hanuman Chalisa?

एक बार अकबर ने संत तुलसीदास को अपने दरबार में बुलाया। जब तुलसीदास ने जाने से मना कर दिया, तो उन्हें ज़बरदस्ती वहाँ लाया गया। अकबर ने कहा, "मैंने सुना है कि तुम मरे हुए लोगों को भी ज़िंदा कर देते हो; मुझे भी कोई चमत्कार दिखाओ।" तुलसीदास ने जवाब दिया, "मैं कोई जादू-टोना नहीं जानता; मैं बस राम का नाम जपता हूँ और सारे चमत्कार उसी नाम से होते हैं।" यह सुनकर अकबर ने उन्हें जेल में डाल दिया, और वहीं उन्होंने Shree Hanuman Chalisa लिखना शुरू किया।

वे रोज़ एक चौपाई लिखते थे और 40 दिनों में हनुमान चालीसा पूरी कर ली; उसी समय, हज़ारों बंदरों ने फ़तेहपुर सीकरी पर हमला कर दिया। तब अकबर के सलाहकारों ने उनसे संत तुलसीदास को रिहा करने की गुज़ारिश की। जैसे ही अकबर ने तुलसीदास को आज़ाद किया, सारे बंदर चले गए।

Hanuman Chalisa in Hindi (Lyrics & Meaning)

इस भक्ति गीत का गहरा अनुभव पाने के लिए भक्त श्रद्धा पूर्वक इसका पाठ करते हैं।

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥

मेरे श्रीगुरुदेव के चरण कमलों की धूल से अपने मन के दर्पण को स्वच्छ करते हुए, मैं प्रभु श्री राम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चार प्रकार के फल – धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को प्रदान करने वाले हैं।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥

हे पवनकुमार! मैं अपने आप को शरीर और बुद्धि से कमजोर जान कर आपका स्मरण करता हूँ। आप मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान देकर मेरे दुःखों व दोषों का नाश कीजिए।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥

हे ज्ञान व गुणों के सागर श्री हनुमान जी, आपकी जय हो। हे कपीश्वर (वानरों के ईश्वर), आपकी जय हो! तीनों लोकों में आपकी कीर्ति है।

रामदूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥ २ ॥

आप अतुलनीय शक्ति के धाम और भगवान श्री राम जी के दूत हैं। आप माता अंजनी के पुत्र व पवनपुत्र के नाम से जाने जाते हैं।

महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥

हे महावीर बजरंग बलि, आप अनन्त पराक्रमी हैं। आप दुष्ट बुद्धि को दूर करते हैं तथा सुमति (उत्तम बुद्धि) वालों के मित्र हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ ४ ॥

आपकी त्वचा सुनहरे रंग की है और आप सुन्दर वस्त्रों से सुसज्जित हैं। आपके कानों में कुण्डल व आपके घुंघराले बाल आपकी शोभा को बढ़ा रहे हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥ ५ ॥

आपके हाथों में गदा और ध्वज है। आपके कंधे पर मूँज का जनेऊ शोभायमान है।

संकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ ६ ॥

हे भगवान शिव के अवतार, राजा केसरी के पुत्र! पूरा ब्रह्मांड आपके पराक्रम, आपकी महिमा और वैभव की वंदना करता है।

बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥

आप विद्या के शास्त्री, गुणी तथा अत्यन्त कुशल व बुद्धिमान् हैं। आप सदैव भगवान श्री राम जी का कार्य करने के लिए तत्पर रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ ८ ॥

भगवान श्री राम जी की महिमा को सुनकर आपको अत्यंत आनंद मिलता है। आपके हृदय में प्रभु श्री राम जी, श्री लक्ष्मण जी और माता सीता का निवास है।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ९ ॥

आपने एक ओर माता सीता को अपना सूक्ष्म रूप दिखाया, तो वहीं दूसरी ओर अपना विकराल रूप धारण करके रावण की लंका को जलाया।

भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥ १० ॥

आपने विकराल रूप धारण कर असुरों का सँहार किया, जिससे प्रभु श्री राम जी का कार्य पूर्ण हुआ।

लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥

संजीवनी बूटी लाकर आपने श्री लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, जिससे प्रभु श्री राम जी ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ १२ ॥

भगवान श्री राम जी ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा, “आप मुझको भरत के समान ही प्रिय हैं”।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥ १३ ॥

“हजार सिर वाले सर्पराज आदिशेष आपकी महिमा गाते हैं!” भगवान श्री राम जी (देवी श्री लक्ष्मी जी के पति) ने आपका हृदय से लगाते हुए ऐसा कहा।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ १४ ॥

सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवगण तथा मुनि नारद, माता सरस्वती और आदिशेष जी;

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ १५ ॥

यहाँ तक कि यम देवता, कुबेर देवता, दिग्पालक (10 दिशाओं के देवता) भी आपकी महिमा का वर्णन नहीं कर पाए हैं। फिर कवि, कोविद (वेदों के ज्ञानी, वेदज्ञ) और विद्वान् इसका पार कहाँ पा सकते हैं।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ १६ ॥

आपने सुग्रीव पर भी बड़ा उपकार किया। आपने उन्हें प्रभु श्री राम जी से मिलवाया और इस प्रकार उनका राज्य किष्किन्धा उन्हें वापस दिलावाया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥ १७ ॥

इसी प्रकार आपके उपदेशों का विभीषण ने भी पालन किया और वह लंका के राजा बने। यह सारा संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥

जो सूर्यदेव हजारों युग मील दूर हैं, आपने उनको एक मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं ॥ १९ ॥

आपने भगवान श्री राम जी की अंगूठी को अपने मुख में रख कर समुद्र पार कर लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।

दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ २० ॥

आपकी कृपा से इस संसार के कठिन से कठिन कार्य भी सहज हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥

प्रभु श्री राम जी के द्वार के आप द्वारपाल हैं। आपकी अनुमति के बिना वहाँ किसी का भी प्रवेश निषेध है, अर्थात भगवान राम के दर्शन आपके आशीर्वाद से ही संभव हैं।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥

जो आपकी शरण लेते हैं, उन्हें सर्व सुख प्राप्त होते हैं। जब आप रक्षक हैं, तब डर भय का कोई अस्तित्त्व ही नहीं है।

आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें कॉपै ॥ २३ ॥

आपके तेज को आप स्वयं ही संभाल सकते हैं। आपके गरजने से तीनों लोक काँप उठते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥

हे महावीर! आपका नाम स्मरण करने से ही, भूत और पिशाच निकट नहीं आते।

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥

हे वीर हनुमान जी, आपके नाम का निरन्तर जप करने से, सब प्रकार के रोग, पीड़ा और कष्ट नष्ट हो जाते हैं।

संकट तें हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥

जो लोग अपने मन, क्रम और वचनों में भगवान् श्री हनुमान जी का ध्यान मनन करते हैं, वे उनके द्वारा जीवन की सभी कठिनाइयों से मुक्ति पाते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥

तपस्वी राजा भगवान श्री राम जी सबसे श्रेष्ठ हैं और आप उन सभी लोगों के कार्य पूर्ण करते हैं, जो प्रभु श्री राम जी की शरणागति हैं।

और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥

जो कोई भी आपके समक्ष अपनी इच्छा लाता है, वे अन्ततः जीवन में असीमित, उच्चतम फल प्राप्त करता है।

चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ २९ ॥

आपकी महिमा चारों युगों में विद्यमान् है। आपकी महानता बहुत प्रसिद्ध है और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में प्रकाशमान् है।

साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥ ३० ॥

आप साधु-सन्तों के रखवाले और असुरों का वध करने वाले हैं और प्रभु श्री राम जी के अत्यन्त प्रिय, दुलारे हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ ३१ ॥

आपको माता जानकी से ऐसा वरदान प्राप्त है कि आप किसी को भी आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ (संपत्तियाँ) दे सकते हैं।

राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥

आपके पास श्री राम नाम का रसायन (भक्ति रस) है। आप सदैव रघुपति (प्रभु श्री राम जी) के भक्त बने रहें।

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥

आपके स्मरण मात्र से स्वयं भगवान श्री राम प्राप्त होते हैं क्योंकि जो कोई भी आपका स्मरण करता है, वह श्री राम प्रभु को अत्यन्त प्रिय होता है तथा उसको जन्म-जन्मान्तर के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।

अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥ ३४ ॥

आपकी स्तुति करने वाले अपने अंत समय में रघुनाथ जी কল্প के धाम को जाते हैं और यदि फिर कहीं भी जन्म लेते हैं तो राम भक्त ही कहलाते हैं।

और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेई सर्ब सुख करई ॥ ३५ ॥

यहाँ तक कि किसी अन्य देवता को पूजे बिना, केवल श्री हनुमान जी को पूजने मात्र से ही सर्व सुख प्राप्त हो जाते हैं।

संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥

हे वीर हनुमान, जो व्यक्ति आपका स्मरण करता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं और उसकी सभी पीड़ा मिट जाती है।

जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥

हे मेरे स्वामी, श्री हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! हमारे परम गुरु के रूप में अपनी कृपा से हमें कृतार्थ कीजिये, आशीर्वाद दीजिये।

जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ॥ ३८ ॥

जो कोई हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करता है, वह सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है और उसे परम आनंद की प्राप्ति होती है।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ ३९ ॥

जो इस हनुमान चालीसा को पढ़ता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं। भगवान शिव स्वयं इसके साक्षी हैं।

तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ ४० ॥

तुलसीदास कहते हैं, हे हनुमान जी, मैं हमेशा भगवान श्री राम का सेवक और भक्त बना रहूँ। और आप सदा मेरे हृदय में निवास करें।

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

हे पवनपुत्र, आप सभी दुखों का नाश करने वाले हैं, आप सौभाग्य और समृद्धि के स्वरुप हैं।

आप भगवान श्री राम जी, श्री लक्ष्मण जी और माता सीता के संग मेरे हृदय में निवास कीजिये।

Benefits of Hanuman Chalisa Reading

भगवान हनुमान को वीरता, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। रोज़ाना श्री हनुमान चालीसा का पाठ करने से हमारी चेतना में भगवान हनुमान के गुण जागृत होते हैं और मन को शांति मिलती है।

भगवान हनुमान की आरती करने से बीमारियाँ, दुख और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है; दुश्मनों और समस्याओं से राहत मिलती है; और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह प्राण शक्ति को बढ़ाती है और मानसिक डर, अंधविश्वास व संदेहों को दूर करके हमारी इच्छाओं को पूरा करने में हमें सक्षम बनाती है।

हनुमान चालीसा की पंक्तियाँ बहुत प्रभावशाली हैं; अगर आप रोज़ इसका पाठ करेंगे, तो आपको इसका असर दिखेगा!

Conclusion

श्री हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन में सकारात्मकता और शक्ति आती है। हनुमान जी की चालीसा को आप हिंदी, अंग्रेजी और तेलुगु में Shree Hanuman Chalisa की PDF Download करें। हनुमान जी की आरती पढ़े या सभी को सुनाये, जय श्री राम!

FAQs

Frequently Asked Questions

हनुमान चालीसा क्या है?
श्री हनुमान चालीसा, भगवान हनुमान की स्तुति में रचित 40 चौपाइयों का एक शक्तिशाली भक्ति-गीत है, जिसे तुलसीदास ने लिखा है।
हनुमान चालीसा किसने रचा?
इसकी रचना 16वीं शताब्दी में संत गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।
हनुमान चालीसा किस भाषा में?
हनुमान चालीसा की मूल भाषा अवधी है।
हनुमान चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
यह मानसिक शांति देता है, डर और तनाव को दूर करता है, आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा देता है और शारीरिक व मानसिक ऊर्जा को बढ़ाता है।
हनुमान चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कब है?
हनुमान चालीसा का पाठ करने का सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक) या संध्याकाल (सूर्यास्त के समय) माना जाता है।
हनुमान चालीसा पढ़ने में कितना समय लगता है?
हनुमान चालीसा का एक बार पाठ करने में आम तौर पर 3 से 5 मिनट का समय लगता है। यह आपके पाठ की गति और तरीके पर निर्भर करता है।
क्या बच्चे भी हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ, बच्चे बिल्कुल हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं।
क्या रात में हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ, रात में हनुमान चालीसा बिल्कुल पढ़ सकते हैं।
क्या महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं।

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